गोपाल दास ‘नीरज’ को सुनना और महसूस करना…

कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे…जाड़े की गुनगुनी धूप और गरमी की शाम में अलीगढ़ के अपने मकान के बरामदे में बिस्तर पर लेटे लेटे अपना ज्यादातर वक्त गुज़ारने वाले नीरज जी अक्सर अपना यही गीत गुनगुनाते थे –देवानंद और राजकपूर की बेहद इज्जत करने वाले, उन्हें सबसे समझदार और शानदार फिल्मकार बताने वाले नीरज जी के लिए उनका यादगार गीत भी हमेशा उनका साथ देता था – ‘दिल आज शायर है, ग़म आज नग़मा है।‘ इसी गीत को उन्होंने अपने फोन की कॉलर ट्यून भी बना रखा था। नीरज जी की दूसरी पुण्यतिथि पर उनकी कुछ यादें, कुछ बातें…

Posted Date:

July 19, 2020

6:43 pm
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