कोस्ली कवि पद्मश्री हलधर नाग को करीब से जानिए

अंगोछे को कंधे पर धरे हुए,अपनी चीजों, अपने पेड़ पौधों, पालतू जानवरों और अपने परिजनों की सुबह-शाम से घिरे हुए, हलधर नाग के होने का मतलब सिर्फ याद है। उडीसा के इस कवि की याद में कभी कोई चूक नहीं होती। उनका बीत चुका समय उनकी स्मृति में एकत्र होता रहता है और अक्सर कविता के रूप में बाहर आता है। पड़ोस और परिवेश का नमक जुबान पर इस कदर लगा हुआ है कि घर नहीं छोड़ते। कहते हैं-“गांव से बाहर जाने का मतलब अपने समय से भी बाहर कदम रखना है।” अपने समय की कद्र करते इस कवि के यहां कविता समाज की चौखट पर एक दरवाजा है।

Posted Date:

October 22, 2017

7:23 pm
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