कस्तूरबा को देखती, महसूस करती एक रहस्यमयी डायरी

मशहूर टीवी पत्रकार विनोद दुआ ने जब नीलिमा डालमिया आधार की नई किताब ‘द सीक्रेट डायरी ऑफ कस्तूरबा’ के हिन्दी संस्करण ‘कस्तूरबा की रहस्यमयी डायरी’ के कुछ हिस्से पढ़े और लेखिका के अनुभवों के साथ इन्हें जोड़ा गया तो लगा मानो हम एक बार फिर उस दौर में जा पहुंचे हों। नीलिमा ने बताया कि कैसे उन्होंने इस किताब को लिखते वक्त और इसके बारे में ऐतिहासिक तथ्यों की पड़ताल करते वक्त कस्तूरबा की जगह खुद को पाया। उन्होंने हर एक पल और लम्हे को कुछ इस तरह महसूस किया मानो जो कुछ कस्तूर के साथ हुआ था, वो उनके साथ हो रहा है।

Posted Date:

August 10, 2017

8:04 pm
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