‘कला-संस्कृति को सियासत से दूर रखें’

जब देश में रंगमंच आंदोलन कहीं हाशिए पर खिसक गया हो और जब रंगकर्मियों के सामने सिनेमा, टीवी और डिजिटल मीडिया की बड़ी चुनौतियां हों, ऐसे में अगर कोई रंगकर्मी लगातार तीन दशकों से नुक्कड़ नाटकों के लिए ही समर्पित हो तो भरोसा जगता है कि रंगमंच कभी खत्म नहीं हो सकता। रंगकर्मी अरविंद गौड़ अपने आप में एक संस्था बन चुके हैं। अरविंद का मानना है कि ‘ नाटक या कला-संस्कृति किसी भी राजनीतिक पार्टी या विचारधारा का हिस्सा नहीं हो सकती। हमारे देश में कला के इतने रूप हैं, इतने आयाम हैं और हर आदमी के भीतर कहीं न कहीं एक कलाकार है। आज जरूरत है उसी कलाकार को सामने लाने की।

Posted Date:

March 28, 2019

9:36 pm
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