एक हिमनद बिछड़ गया…
सुंदरलाल बहुगुणा के देह त्यागने के साथ ही आज जैसे एक हिमयुग का अंत हो गया… लेकिन वास्तव में देह तो उन्होंने दशकों पहले तब ही त्याग दी थी जब हिमालय और नदियों की अक्षुण्णता बनाए रखने और बांधों से उन्हें न जकड़ने की मांग को लेकर उन्होंने लंबे सत्याग्रह और उपवास किए, प्रकृति की ख़ातिर तभी वो विदेह हो चुके थे… अपने शरीर को कष्ट दे ये समझाने की कोशिश करते रहे कि कुदरत का कष्ट कहीं ज़्यादा बड़ा है, उसे जल्द समझा जाना चाहिए… प्रख्यात पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा के जाने पर सुशील बहुगुणा  ने उन्हें अपने फेसबुक पेज पर कुछ इस तरह याद किया… 
Posted Date:

May 21, 2021

4:02 pm
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