एक लंबा वाक्य जो अनंनता की ओर अग्रसर था

 विष्णु खरे के कवि-व्यक्तित्व को किसी  एक खांचे या सांचे में ढाला नहीं जा सकता। उनके यहां भिन्न प्रकार की कविताएं हैं। कुछ तो ऐसी हैं कि जिनका भरपूर आस्वाद करने के लिए पाठक को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। कई बार शब्दों के अर्थों के लिए शब्दकोष देखने पड़ सकते हैं क्योंकि उर्दू की ऐसी शब्दसंपदा उनके यहां है जो आम बोलचाल में नहीं मिलती। और हां,  आवश्यक नहीं कि शब्दकोश से ही काम चल जाए, आपको  विश्वकोश यानी इनसाइक्लोपीडिया भी देखना-पढ़ना पड़ सकता है अरबी या फारसी साहित्य के किस प्रसंग का उल्लेख किया जा रहा है। 

Posted Date:

August 6, 2019

4:47 pm
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