‘इन दिनों कोई किसी को अपना दुख नहीं बताता’

मंगलेश जी जैसे संवेदनशील कवियों, रचनाकारों के लिए 2014 के बाद से हिन्दूवादी ताकतों के जबरदस्त उभार, देश के पूरे परिदृश्य में एक भयानक और आक्रामक सियासी मनमानियों ने खासी मुश्किलें खड़ी करना शुरु कर दी थीं। विरोध की आवाज़ उठाने वालों और इस लहर के खिलाफ बोलने वालों पर हमले से लेकर हत्याओं तक के सिलसिले ने मंगलेश जी और तमाम रचनाकारों, कलाकारों को प्रतिरोध की आवाज़ तेज करने को मजबूर किया। ये आवाज़ें सत्तर और अस्सी के दशक में भी उठी थीं जब देश सत्ता की निरंकुशता का दंश झेल रहा था। इतने सालों बाद फिर उससे भी भयावह स्थितियां महसूस करते हुए मंगलेश जी काफी बेचैन थे। 

Posted Date:

December 10, 2020

10:47 pm
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