अलविदा अदाकार-ए-आज़म दिलीप कुमार

दिलीप साहब किस गहराई से आज भी लोगों के दिलो दिमाग पर छाए रहे और किस तरह सिनेमा को उन्होंने नई दिशा दी, ट्रेजेडी को भी एक रूमानियत की बेहतरी अभिव्यक्ति बना दी… ये सब बहुत साफ हो रहा है.. सिनेमा भले ही कहां से कहां आ गया है, तकनीक से लेकर सोच तक और  कथानक से लेकर अभिनय तक, सबकुछ बदल गया हो, लेकिन दिलीप साहब आखिरी वक्त तक दिलीप कुमार ही रहे.. वही अपने युसूफ साहब…. जो अल्फाज़ और अनुभव या कहूं कि दिल की कुछ आवाज़ें जो फेसबुक पर सुनाई, दिखाई दीं, उनमें से चंद 7 रंग के पाठकों के लिए पेश है….

Posted Date:

July 7, 2021

4:17 pm
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