‘अब उस शहर में लोगों के शीशे के मकां कैसे हैं…’

वरिष्ठ पत्रकार और बीबीसी से लंबे वक्त तक जुड़े रहे क़ुरबान अली ने अपने शुरुआती दिनों में डॉ राही मासूम रज़ा के साथ कई मुलाकातें कीं, बहुत सा वक्त गुज़ारा… तब से लेकर आजतक देश के हालात को करीब से देखने वाले कुरबान अली ने डॉ रज़ा के गुज़रने के बाद ये आलेख संडे ऑब्जर्वर में लिखा था… उन्होंने डॉ राही मासूम रज़ा को कैसे देखा.. आप भी पढ़िए…  

Posted Date:

March 15, 2020

3:41 pm
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