आखिर एक पहेली क्यों हैं रेखा?

रेखा जी के जन्मदिन पर खास

किसी ज़माने की अल्हड़, शोख़ और ग्लैमर की अपनी परिभाषा लिखने वाली रेखा महज 63 साल की उम्र में इतनी तन्हा क्यों हैं? क्यों उनकी ख़ूबसूरती और आंखों की मस्ती के दीवाने  भी हर बार उनसे जुड़े विवादों के बारे में ज्यादा जानने को बेताब रहते हैं? क्यों उनके जन्मदिन को कुछ टीवी चैनलों ने उन पर फिल्माए गए कुछ गीतों पर आधारित कार्यक्रमों तक सीमित कर दिया है? कई सवाल हैं लेकिन रेखा की ज़िंदगी और उनके कामकाज को समझना है तो उनसे जुड़ी कुछ पहेलियों को जानना होगा।

आज 75 साल की उम्र में भी अपनी दमदार आवाज़ और ऊर्जा से भरे अमिताभ बच्चन जितने सक्रिय हैं, जिस तरह इंडस्ट्री पर आज भी राज कर रहे हैं, उनसे बारह साल छोटी रेखा वैसा कुछ नहीं कर रहीं। बड़ी मुश्किल से रेखा जी किसी अवार्ड शो में या टीवी शो में नज़र आती हैं, लेकिन जहां भी वो जाती हैं, इस बात से परेशान हो जाती हैं कि मीडिया उन्हें आज भी अमित जी के साथ जोड़ने से बाज नहीं आता। वो अब इस किस्से से दूर रहना चाहती हैं।

राज्यसभा में उन्हें सम्मान के साथ सदस्यता दी गई लेकिन इतने सालों में उनकी मौजूदगी इतनी कम रही कि उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग भी उठने लगी। लेकिन जब भी रेखा संसद गईं, मीडिया के लिए या फिर नेताओं के लिए एक ग्लैमर ही बनी रहीं। जया बच्चन तो फिर भी एक जनप्रतिनिधि और तमाम मसलों पर बोलने वाली, महिलाओं से जुड़े मुद्दे उठाने वाली सांसद के तौर पर खुद को स्थापित करने में कामयाब रहीं लेकिन रेखा ऐसा कुछ नहीं कर पाईं। ऐसा क्यों हुआ और क्यों वो सबकुछ चाहकर भी खुद को तन्हा रखती हैं, कुछ नहीं बोलतीं और मीडिया से फ़ासले बनाकर रखती हैं, यह उनका नितांत निजी मामला है। लेकिन ये सच है कि उनकी तन्हाई के पीछे उनके निजी जीवन के उतार चढ़ाव और ग्लैमर की दुनिया की कड़वी हकीकत है।

अगर बांद्रा बैंड स्टैंड के अपने ‘बसेरे’ में वो ज्यादातर वक्त अकेले गुज़ारना पसंद करती हैं, तन्हाइयों में अपनी पुरानी यादों को संजो कर रखती हैं या फिर अकेले खुद ही चंद गीत गुनगुनाती हैं, कुछ अफ़साने लिखती हैं और बेहद सोच समझ कर सार्वजनिक समारोहों में हिस्सा लेती हैं तो बेशक इसके पीछे एक बड़े कलाकार का अकेलापन है। आज भी कुछ फिल्मकार उन्हें अपनी फिल्म में लेना चाहते हैं, कोशिशें करते हैं, लेकिन रेखा बगैर सोचे समझे कोई कदम नहीं उठातीं। मीडिया से वह दूर रहती हैं, इंटरव्यू जल्दी देती नहीं लेकिन अगर किसी समारोह में जाती हैं तो फोटोग्राफर्स को निराश नहीं करतीं। यहां तक कि संसद में भी हाल के दिनों में वो गईं तो खबर बन गईं और उनकी तस्वीरें तमाम अखबारों में छपीं, चैनलों में दिखीं लेकिन उनकी आवाज़ किसी ने नहीं सुनी।

रेखा के इस 63वें जन्मदिन पर हम उन्हें दिल से बधाई देते हैं, उन्हें जल्दी फिर से कुछ चुने हुए और बेहतरीन किरदारों में देखने की तमन्ना रखते हैं और उनपर भी एक बायोपिक बने, यह आग्रह कुछ संवेदनशील फिल्मकारों से करते हैं। साथ ही ‘7 रंग’ के पाठकों और दर्शकों के लिए हम यू ट्यूब के दो लिंक भी शेयर कर रहे हैं जिसमें रेखा जी को आप एक नए अंदाज़ में देखेंगे और सुनेंगे। एक रेखा जो बेहतरीन आवाज़ की मल्लिका भी हैं, एक रेखा जिनकी आवाज़ में एक खास किस्म की कशिश है और एक रेखा जो अभिनेत्री के साथ एक गायिका का भी हुनर रखती हैं।

क्लिक कीजिए और रेखा जी को सुनिए

 

https://www.youtube.com/watch?time_continue=38&v=nKjYbNvUuOQ

 

Posted Date:

October 10, 2017

11:03 am

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