क्या आपको पोस्टकार्ड की याद है?

लखनऊ में लगने जा रही है पोस्टकार्ड की कला प्रदर्शनी

इंटरनेट और ईमेल के ज़माने में लोग भले ही चिट्ठी पत्री के परंपरागत जरिये को भूलते जा रहे हों, अंतरदेशीय और पोस्टकार्ड के नाम से वाकिफ न हों, लेकिन आज भी पोस्टकार्ड की कितनी अहमियत है, इसे कुछ कलाकार शिद्दत के साथ महसूस करते हैं। इस दिशा में लखनऊ का सप्रेम संस्थान अहम भूमिका निभा रहा है। देशभर के कलाकारों, कवियों और लेखकों को एक मंच पर लाकर यह संस्थान आगामी जून में पोस्टकार्ड पर बनी कलाकृतियों की एक प्रदर्शनी लगाने जा रहा है। इसे खास तौर से भारतीय सेना के उन जवानों को समर्पित किया जा रहा है जो दूर दराज़ के इलाकों में परिवार से काफी दूर देश की सेवा में दिन रात लगे रहते हैं और जिनके लिए आज भी पोस्टकार्ड और डाक विभाग ही संपर्क का एक ज़रिया है।

अखिल भारतीय पोस्टकार्ड कला प्रदर्शनी के संयोजक भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने बताया कि इस प्रकार की प्रदर्शनी उत्तर प्रदेश में पहली बार लगाई जा रही है। प्रदर्शनी का केंद्र बिंदु भारतीय सेना और भारतीय पोस्टकार्ड होगा। इसी विषय पर लोगों की कृतियां होंगी। इस प्रदर्शनी में देश भर के कलाकारों, प्रिंटमेकरों, मूर्तिकारों, छायाकारों, कवियों, लेखकों और बच्चों की पोस्टकार्ड पर बनी कृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा।

इस प्रदर्शनी को डिजाइन करते हुए यह महसूस किया गया कि डाक नेटवर्क आज भी व्यापक स्तर पर है और देश के दूरस्थ क्षेत्रों तक आसानी से पहुंचता है। प्रदर्शनी का शीर्षक” Salute to Indian army on post card (पोस्ट कार्ड पर भारतीय सेना को सलाम)” है।

पोस्टकार्ड एक मोटे कागज या पतले गत्ते से बना एक आयताकार टुकड़ा होता है जिसे संदेश लिखने के लिए प्रयोग किया जाता है, काफी समय से जहाँ संदेश भेजने का चलन बदल गया जिसके कारण पोस्टकार्ड का चलन भी लगभग बन्द सा हो गया।

यह प्रदर्शनी पोस्टकार्ड को एक फिर सबके बीच लाने का एक छोटा सा प्रयास है। सप्रेम संस्थान ने कुछ दिन पहले पुस्तकों पर बनी कलाकृतियों की भी प्रदर्शनी लखनऊ पुस्तक मेले में लगाई थी जो कि उत्तर प्रदेश की पहली प्रदर्शनी थी। इसमे देश के विभिन्न प्रदेशों के कलाकारों ने अपनी कृतियों को प्रदर्शित किया था।

Posted Date:

May 2, 2019 11:16 am

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