‘उत्तर आधुनिकता परोसने की कोशिश में सुमेरू पर्वत न उठाएं’

“कथा संवाद ” में वंदना जोशी की कहानी “नगर ढिंढोरा” ने बजाया डंका             

 गाजियाबाद। साहित्य देश और समाज की तस्वीर हमारे सामने लाने का शाश्वत जरिया है। कलमकार के रूप में हमारी जिम्मेदारी है कि हम देश में पनप रही विद्रूपताओं और विसंगतियों को देखें, समझें और इस बात का आकलन करें कि इनके निस्तारण में एक कलमकार भूमिका कैसे निभाए। मीडिया 360 लिट्रेरी फाउंडेशन के “कथा संवाद” को संबोधित करते हुए कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. अशोक मैत्रेय ने उक्त उद्गार प्रकट किए। डॉ. मैत्रेय ने कहा कि लेखक अपने कहन को जितना सहज बनाएगा पाठक से उतनी ही गहराई से जुड़ेगा। उन्होंने कहा कि कुछ फैशन परस्त साहित्यकारों ने उत्तर आधुनिकता परोसने के चक्कर में सुमेरु पर्वत ही उठा लिया। ऐसे लेखक रचना को पाठक पर पत्थर की तरह फेंकते हैं। या तो उनकी रचना संभालो या उसकी मार से मर जाओ। इस तरीके का साहित्य समाज और पाठक किसी का भला नहीं करता। 

होटल रेडबरी में आयोजित “कथा संवाद” में डॉ. मैत्रेय ने कुछ दोहे भी सुनाए। उन्होंने कहा “चिड़ियों तुम सब एक हो थामो चोंच मशाल, बाद सभी घबरा उठें ऐसा करो धमाल,” “बोली नदी समुंद्र से आई तेरे पास, मीठी थी खारी हुई फिर भी नहीं उदास,” “मैं समुंद्र हूं नदी के पास जाना चाहता हूं, नीर खारा है उसे मीठा बनाना चाहता हूं।”

कथा संवाद के मुख्य अतिथि डॉ .अजय गोयल ने कन्या भ्रूण हत्या को केंद्र में रखकर “सोन चिरैया का पहला गीत” जैसी मार्मिक कहानी पढ़ी। वंदना जोशी ने कहानी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डॉ. गोयल को संवेदनाओं का चिकित्सक बताया।

वंदना जोशी की कहानी “नगर ढिंढोरा” को भरपूर सराहना मिली। संचालक प्रवीण कुमार ने वंदना जोशी की कहानी को देश काल की जीवंत रिपोर्टिंग बताया। आलोक यात्री ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि “नगर ढिंढोरा” इस बात का उदाहरण है कि मौजूदा दौर में टेक्नोलॉजी संबंधों को कैसे खोखला कर रही है। डॉ. वीना शर्मा की कहानी “दवाई”, सुरेंद्र सिंघल की कहानी “मेरा दोस्त सोच में पड़ गया’, शिवराज सिंह की कहानी “शहंशाह सुल्तान” और डॉ. बीना मित्तल की कहानी “बाल विधवा” भी सराही गईं। दीपाली जैन जिया का व्यंग “षष्टि पूर्ती भी सराहा गया। व्यंगकार सुभाष चंद्र ने कहा कि इस तरह के आयोजन साहित्य को समृद्ध करते हैं। डॉ. धनंजय सिंह, गोविंद गुलशन, सुभाष अखिल, रवि अरोड़ा, डॉ. जकी तारिक, अजय फलक, उमा, कांत दीक्षित, कल्पना कौशिक, आर.के. भदौरिया ने भी चर्चा में भाग लिया। इस अवसर पर सुशील गुप्ता, वागीश शर्मा, भारत भूषण बरारा, सुदामा पाल, डॉ. दीपशिखा गोयल, अशोक गोस्वामी, अशोक कौशिक, अजय वर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्य अनुरागी उपस्थित थे।

Posted Date:

July 15, 2019 2:15 pm

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