जश्न-ए-बचपन खत्म: 9 दिनों में 10 हाउसफुल शो

हिट हिंदी नाटक टोटो चान के साथ संपन्न हुआ 14वां जश्नेबचपन उत्सव

  • अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच उत्सव को 9000 लोगों ने देखा
  • इसमें पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और असम आदि राज्यों से 21 क्षेत्रीय नाटक शामिल थे
  • 10 नाटकों के शो हाउसफुल रहे
  • अनेक साधनहीन बच्चों को उनके पसंदीदा नाटक नि:शुल्क दिखाये गये

विहान ड्रामा वर्क्स का नाटक – टोटो चान का एक दृश्य

नई दिल्ली, 25 नवंबर, 2018: भोपाल के विहान ड्रामा वर्क्स के हाउसफुल प्रोडक्शन- टोटो चान के साथ, बच्चों के अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच उत्सव जश्नेबचपन का 14वां संस्करण आज यहां संपन्न हो गया। बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ रंगमंच के इस नौ-दिवसीय नाट्य उत्सव की शुरुआत जावा के एक संगीतमय नाटक- सूखा पत्ता से हुई थी, जिसमें जीवन की विभिन्न जटिलताओं के बारे में बताया गया था।

जश्नेबचपन के नाटकों ने न केवल अपने युवा प्रशंसकों को आकर्षित किया, बल्कि लगभग सभी उम्र समूह के लोगों ने इनमें दिलचस्पी दिखायी। दिल्ली में जारी, भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) समेत शहर के अन्य प्रमुख आयोजनों के बावजूद लगभग 9000 दर्शकों ने इस 9-दिवसीय रंगमंच उत्सव में भाग लिया। इस साल 23 नाटकों का प्रदर्शन चार सभागारों – सम्मुख, अभिमंच, अभिकल्प और लिटिल थिएटर ग्रुप (एलटीजी) में किया गया था। उत्सव के 14वें संस्करण में कुल 221 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं।

उखानु (अहमदाबाद), असली पंख (जोधपुर), शी स्टुड अप (चंडीगढ़), अंधन नाई (केरल), टोटो चान (पटना), हा-जा-बा-रा-ला (कोलकाता) और स्मार्टफोन (असम) जैसे क्षेत्रीय नाटकों ने दर्शकों को हंसाया भी और रुलाया भी। अंतर्राष्ट्रीय नाटक, सूखा पत्ता (इंडोनेशिया) और प्यूबर्टी (श्रीलंका) ने अपने शक्तिशाली चित्रण और प्रस्तुति के बल पर दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया।

 ‘गरजे गिरनारी बिल्ली ‘ का एक दृश्य

श्री सुरेश शर्मा, डायरेक्टर-इन-चार्ज, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा इस सांस्कृतिक समागम से उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, “मैं पिछले 19 सालों से एनएसडी में हूं और निदेशक-प्रभारी के रूप में यह मेरा पहला उत्सव है। मुझे बहुत खुशी है कि उत्सव ने विभिन्न संस्कृतियों के बीच की खाई के बीच एक पुल बनाने की कोशिश की है। इसमें बच्चों को न केवल अपने प्रोडक्शन के बारे में, बल्कि एक-दूसरे की संस्कृति के बारे में भी पता चला। हम इस उत्सव को नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से बाहर लाने और दिल्ली व एनसीआर के अन्य सभागारों में भी आयोजित करने की योजना पर विचार कर रहे हैं।”

इस बार एनएसडी की टीआईई कंपनी ने 18 नये निर्देशकों को अवसर दिया था, ताकि उन्हें अपनी पहली प्रस्तुति के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय मंच मिल सके। प्रतिदिन होने वाली निर्देशकों की बैठक में, बच्चों के थिएटर को मुख्यधारा में लाने के लिए किए जा रहे संघर्षों के बारे में चर्चा की गयी। बच्चों के रंगमंच के परिदृश्य के बारे में चर्चा करने के लिए, उत्सव के दौरान दो-दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गयी, जिसमें प्रतिष्ठित विद्वानों ने बच्चों के रंगमंच से संबंधित बाधाओं पर चर्चा की गयी।

आज के संदर्भ में समारोह में दिखाया गया नाटक – स्मार्टफोन

दिल्ली व एनसीआर के विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े लगभग 800 साधनहीन बच्चों ने कई नाटक नि:शुल्क देखे। इस पहल के पीछे विचार यह था कि ऐसे बच्चों में एक वैश्विक मंच पर मनोरंजन के साथ कला व संस्कृति के प्रति लिए उत्साह पैदा किया जाये। एनएसडी के संडे क्लब के छात्रों ने सभागार में हर नाटक से पहले अपना प्रदर्शन किया।

द्विवार्षिक उत्सव – जश्नेबचपन, देश भर में बच्चों के रंगमंच के विकास में योगदान देने के लिए 1998 में शुरू हुआ था। अपने शुरुआती वर्षों की सफलता के बाद, अब यह भारत में बाल रंगमंच के सबसे बड़े और सर्वाधिक महत्वपूर्ण रंगमंच उत्सवों में से एक बन गया है।

(एनएसडी की प्रेस विज्ञप्ति)  

 

 

Posted Date:

November 26, 2018 9:01 pm

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