कला के कई रूप हैं। रंगों की अपनी भाषा है। रेखाएं बोलती हैं। कलाकृतियां कुछ कहती हैं। चित्रों के पीछे पूरा एक दर्शन छुपा होता है और रंगों के संयोजन के पीछे कहीं न कहीं कोई कल्पना होती है। देशभर में कलाकार तो भरे पड़े हैं, दिल्ली, मुंबई समेत तमाम बड़े शहरों में बनी आर्ट गैलरी किसी न किसी कलाकार के काम का एक बेहतरीन आईना भी हैं। लेकिन तमाम कलाकारों का दर्द है कि इस देश में कला की कद्र नहीं। तमाम अकादमियां हैं, आर्ट और स्कल्पचर के तमाम कॉलेज हैं, बड़ी संख्या में यहां ये हुनर सीखने वाले भी हैं लेकिन ऐसा क्या है जो कलाकारों के भीतर उपेक्षा का भाव भरता है। हमारा मकसद इन सवालों पर बहस के साथ साथ देश भर के उन कलाकारों को मंच देना है और उनके काम को एक बड़ा आयाम देना है जो महज गैलरी में सिमट कर रह जाते हैं और चंद पेंटिग्स के बिक जाने का इंतज़ार भर करते हैं। कला के क्षेत्र में नया क्या हो रहा है, नई पीढ़ी के कलाकार क्या कर रहे हैं और जाने माने कलाकारों के काम को दुनिया किस तरह देख रही है – ये सब हम बताने की कोशिश करेंगे।


रज़ा और उनके सहयात्री कलाकार
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July 12, 2019

किसी बड़े कलाकार के अवदान के मूल्यांकन के लिए उसके संपूर्ण कलाकर्म को ध्यान में रखना जरूरी होता है। लेकिन सिर्फ इतने से ही बात नही बनती। ये भी देखना चाहिए कि उसका अपने सहकर्मी कलाकारों से कैसा संबंध रहा। कला एकांत साधना है पर साथ ही सामूहिक कर्म भी है। जब कोई कलाकार- लेखक और संगीतकार भी- किसी दौर में सक्रिय होता हैं तो उसी दौर में उसके कुछ सहयोगी भी सक्रिय रहते हैं जिनसे उसका संवाद भ

अब प्रभाकर बर्वे की कला को ‘निर्विवाद’ देखिए…
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June 19, 2019

इस बार न तो अमोल पालेकर थे और न ही चुनावी मौसम का आतंक। न कोई विवाद और न ही कोई रोक टोक। जाने माने कलाकार प्रभाकर बर्वे के कामकाज को मुंबई के बाद अब दिल्ली में लोग नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट की कला दीर्घा में 28 जुलाई तक आराम से देख सकते हैं। इसी साल फरवरी में मुंबई में आयोजित इस प्रदर्शनी की चर्चा कम और अमोल पालेकर को बोलने से रोकने की चर्चा ज्यादा हुई थी। हालत ये हुई कि प्रभाकर बर्वे के

उपेन्द्र महारथी का कला संसार देखना है तो जयपुर हाउस आइए
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June 19, 2019

क्या आपने बावनबूटी साड़ियों के बारे में सुना है? क्या आपको उपेन्द्र महारथी के बारे में पता है? क्या आपको पता है कि किस कलाकार ने गांधी जी के साथ साथ गौतम बुद्ध के शांति और अहिंसा के संदेश को अपने तमाम कला रूपों में कैसे कैसे उतारा या कलिंग की संस्कृति के साथ बंगाल के पुनर्जागरण आंदोलन के नायकों की कथाओं को रंगों और शिल्प की बेहतरीन दुनिया में कैसे आकार दिया? दरअसल हम बात कर रहे हैं उपे

भोजपुरी मिट्टी के रंग
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May 13, 2019

कला में सार्वजनीयता होती है लेकिन साथ ही स्थानीयता भी होती है। पर स्थानीयता के भी कई रूप होते हैं। कुछ कलाकार स्थानीयता को लेकर ज्यादा सजग होते हैं। जैसे कि युवा और उदीयमान पेंटर रजनीश सिंह। रजनीश गोरखपुर के रहनेवाले हैं और इन दिनों दिल्ली में रह रहे हैं। वे वैसे तो अमूर्त कलाकार हैं लेकिन उनके अमूर्तन में भोजपुरी का स्पर्श है और इसे सजग होकर ही महसूस किया जा सकता है। उनकी सभी तो न

क्या आपको पोस्टकार्ड की याद है?
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May 2, 2019

इंटरनेट और ईमेल के ज़माने में लोग भले ही चिट्ठी पत्री के परंपरागत जरिये को भूलते जा रहे हों, अंतरदेशीय और पोस्टकार्ड के नाम से वाकिफ न हों, लेकिन आज भी पोस्टकार्ड की कितनी अहमियत है, इसे कुछ कलाकार शिद्दत के साथ महसूस करते हैं। इस दिशा में लखनऊ का सप्रेम संस्थान अहम भूमिका निभा रहा है। देशभर के कलाकारों, कवियों और लेखकों को एक मंच पर लाकर यह संस्थान आगामी जून में पोस्टकार्ड पर बनी कल

‘प्रथमा’ की कलाकारों ने कितना ‘स्तब्ध’ किया…
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April 29, 2019

ललित कला अकादमी पिछले दिनों पांच महिला कलाकारों के बेहतरीन काम का गवाह बनी। इन पांचों कलाकारों ने अपनी सामूहिक प्रदर्शनी का नाम दिया था – ‘प्रथमा’। इन पांचों में एक मूर्तिशिल्पी हैं- निवेदिता मिश्रा, एक सेरामिक कलाकार हैं-मीनाक्षी राजेंद्र और तीन पेंटर हैं-माधुरी शर्मा, सोनी खन्ना और विम्मी इंद्रा। इन कलाकारों ने मिलकर ‘‘स्तब्धिका’ नाम की संस्था बनाई है। इन कलाकारों का कहना है

15 कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कार
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March 24, 2019

ललित कला अकादेमी की ओर से हर साल आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी कला समुदाय के कैलेन्डर में सर्वाधिक प्रतिष्ठित आयोजन है। इस वर्ष आयोजित 60वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी उत्कृष्ट कलात्मक कृतियों के प्रदर्शन के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाशाली कलाकारों को अनुशंसा और मान्यता प्रदान करने का भी एक मंच है। इसमें प्रदर्शित सभी कृतियाँ सौंदर्यांत्मक अपील और माध्यमों

क्या आपने ममता बनर्जी के भीतर का कलाकार देखा है?
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February 5, 2019

क्या आप जानते हैं कि दुनियाभर में अपनी जुझारू और लड़ाकू छवि के लिए मशहूर ममता बनर्जी एक बेहतरीन पेंटर, कवियत्री और लेखिका भी हैं? संगीत में उनकी गहरी रूचि है और पिछले ही साल दुर्गापूजा के मौके पर ममता बनर्जी ने रौद्रर छाया नाम का एक अल्बम भी जारी किया है जिसमें उनके कंपोज किए गए सात गीत हैं। हालांकि उनके व्यक्तित्व के इन पहलुओं को लेकर सियासत भी खूब होती रही है। लेकिन ममता ने अपनी रच

क्या आपने ऐसी अद्भुत लाइब्रेरी देखी है?
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February 2, 2019

देश भर में पुस्तकालयों की खस्ता हालत के बारे में हम अक्सर पढ़ते रहते हैं। यह बहस भी अक्सर सुनने को मिलती है कि इस डिजिटल ज़माने में किताबों के लिए किसके पास वक्त है। इसके बावजूद देश भर में पुस्तक मेलों का चलन बढ़ रहा है और प्रकाशकों की चांदी हो गई है। पुस्तकालयों को लेकर भी नज़रिये में बदलाव आ रहा है।

एक गुमनाम कलाकार और गांधी का दांडी मार्च
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January 18, 2019

अपने देश में गांधी जी पर बहुत काम हुआ है। गांधी को एक व्यक्ति से ज्यादा एक दर्शन माना जाता है और वही दर्शन हमारे कलाकारों से लेकर बुद्धिजीवियों तक को प्रेरणा देता रहा है। गांधी जी की 150वीं जन्म शताब्दि के मौके पर देश भर में उनके दर्शन से लेकर उनकी जीवन यात्रा को अपने अपने तरीके से बताने-दिखाने की कोशिशें हो रही हैं। दिल्ली की नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट में गांधी के जीवन की एक अहम घटना

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