‘नैयर साहब का जाना मन में टीस पैदा करता है’

वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप तलवार ने कैसे याद किया कुलदीप नैयर को…

कुलदीप नैयर

वो साठ का दशक था। कुलदीप नैयर तब एक उर्दू अखबार ‘अंजाम’ में काम करते थे। मेरी उर्दू और हिन्दी अच्छी थी और नैयर साहब उर्दू के साथ अंग्रेज़ी में काफी उम्दा लिखते थे। नैयर साहब हिन्दी में नहीं लिखते थे। लेकिन उनके अंग्रेज़ी में लिखे लेखों का हिन्दी अनुवाद छपता था। मुझसे 7-8 साल बड़े थे। हमें उनके साथ ‘अंजाम’ में साथ काम करने का मौका मिला। उनसे बहुत कुछ सीखा। बेहतरीन इंसान थे। बेहद सरल। उनके पिता सियालकोट में डॉक्टर हुआ करते थे लेकिन बंटवारे के बाद नैयर साहब यहां आ गए। लिखने पढ़ने वाले और पाकिस्तान को समझने वाले बेहतरीन पत्रकार थे।

कुलदीप तलवार

हम दोनों की ज़ड़ें मूल रूप से पाकिस्तान से थीं। इसलिए पाकिस्तान हमारा प्रिय विषय रहा। हमने वहां की राजनीति से लेकर तमाम पहलुओं पर खूब लिखा।  एक दूसरे का बतौर पत्रकार हम काफी सम्मान करते थे। लेकिन नैयर साहब दिल्ली में रहे और हर कूटनीतिक मामलों में उनकी कलम का लोहा तमाम लोगों ने माना। चाहे वो बांग्लादेश का मामला हो या पाकिस्तान का या फिर दूसरे पड़ोसी देशों का, कुलदीप नैयर की राय अहम मानी जाती थी।

1975 की इमरजेंसी में जेल भी गए और जनता पार्टी की मिली जुली सरकार के दौरान भी उनकी भूमिका कम महत्वपूर्ण नहीं थी। बाद में गुजराल साहब की सरकार के दौरान 1997 में नैयर साहब राज्यसभा में भी मनोनीत हुए। इससे पहले 1990 में ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त भी रहे। पत्रकार तो थे ही सोशल एक्टिविस्ट भी रहे। चाहे कश्मीर का मसला हो या पाकिस्तान का, हर सरकार में उनकी राय का अपना मतलब होता था। राजदूत रहते हुए बहुतों ने नैयर साहब का खूब फायदा उठाया। मैंने कभी कुछ नहीं कहा, हमेशा पत्रकारिता और देश-विदेश के हालात पर ही बात होती थी। इसलिए उनकी नजर में मेरी इज्जत थी।

जब भी मिलते थे बेहज ज़िंदादिली से मिलते थे। गाजियाबाद भी कई बार आए। जब भी किसी कार्यक्रम में आए, मुलाकात जरूर हुई। बेनज़ीर भुट्टो के ज़माने में नैयर साहब अक्सर पाकिस्तान जाते थे। पाकिस्तान के हुक्मरानों से और वहां के खबरनवीसों से उनके ताल्लुकात अच्छे थे और वहां भी उनकी खूब इज्जत थी। उनके कॉलम खूब पढ़े जाते थे। ‘बिटविन द लाइन्स’ और ‘बियॉन्ड द लाइन्स’ उनके चर्चित कॉलम्स थे। बेशक नैयर साहब का जाना तकलीफदेह है। उनसे हम सबको सीखना चाहिए कि पत्रकार अंतिम सांस तक पत्रकार रहता है, कभी रिटायर नहीं होता। आप जितना सक्रिय रहेंगे, लिखते पढ़ते रहेंगे, हर पीढ़ी के लोग आपका सम्मान करेंगे। कुलदीप नैयर साहब को दिल से श्रद्धांजलि।

 

Posted Date:

August 23, 2018 3:04 pm

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