‘सामाजिक सरोकारों के धारदार पत्रकार थे कुलदीप नैयर’

मीडिया 360 लिट्रेरी फाउंडेशन की शोक सभा में याद किए गए कुलदीप नैयर
गाजियाबाद। जाने माने  पत्रकार कुलदीप नैयर को देश के तमाम हिस्सों में अपने अपने तरीके से याद किया जा रहा है। 95 साल की उम्र तक लगातार सक्रिय रहते हुए सबको अलविदा कह गए कुलदीप नैयर को गाजियाबाद में भी पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और साहित्यकारों ने  याद किया। वयोवृद्ध पत्रकार और कवि कृष्ण मित्र ने उस दौर की चर्चा की जब वे वीर अर्जुन अखबार में अटल जी के साथ काम करते थे। उन्होंने बताया कि उस दौर में तमाम वैचारिक असहमतियों के बावजूद कुलदीप नैयर के लेख को पूरे सम्मान के साथ ज्यौं का त्यौं छापा जाता था। कृष्ण मित्र ने कहा कि वह तभी से नैयर साहब की लेखनी के मुरीद हो गए और उनके सभी लेख और कॉलम नियमित रूप से पढ़ते थे। तब और आज के दौर की पत्रकारिता में आए बदलावों की चर्चा करते हुए उन्होंने कुलदीप नैयर को भावुक होकर याद किया और आज की पीढ़ी को उन्हें पढ़ने और उनसे सीखने को कहा।
 मीडिया 360 लट्रेरी फाउंडेशन की ओर से आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए श्री मित्र ने कहा कि उनकी पीढ़ी देश के बंटवारे का दंश लेकर पत्रकारिता के क्षेत्र में उतरी थी। दिल्ली के बल्लीमारान से शुरू हुई श्री नैयर की पत्रकारिता में कई पड़ाव आए। वह देश के इकलौते ऐसे पत्रकार थे जिनका चिंतन एक साथ विश्व के 80 देशों के अखबारों में छपता था। सामाजिक सरोकार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पत्रकारों के लिए आज भी अनुकरणीय है। उनकी लेखनी भले ही तलवार थी लेकिन मानवता के वह असल मसीहा थे।
फाउंडेशन के पदाधिकारी प्रवीण कुमार ने कहा कि दिल्ली विश्व विद्यालय से जन संचार की पढ़ाई के दौरान श्री नैयर से उनका साक्षात्कार कॉलेज के वार्षिक समारोह में हुआ था। उन्होंने कहा कि “बिहाइंड द लाइंस” पुस्तक सहित श्री नैयर का तमाम लेखन यह बताता है कि उन जैसे व्यक्तित्व के लिए एक जिंदगी काफी नहीं है। डॉ. महकार सिंह ने कहा कि वह साइंस के मेधावी छात्र थे। लेकिन उनके भीतर कुलदीप नैयर जी ने ही पत्रकारिता का बीज रोपा था। आज जब सामाजिक सरोकारों पर बाजार को हावी होते देखते हैं तो बहुत तकलीफ होती है। पत्रकार और कवि राज कौशिक ने कहा कि श्री नैयर से उनकी पीढ़ी तक आते-आते पत्रकारिता में सच की कीमत थी। आज की पत्रकारिता से सच विलुप्त हो चुका है।
  फाउंडेशन के अध्यक्ष शिवराज सिंह ने कहा कि मीडिया पर आज बड़ी जिम्मेदारी है। क्योंकि दिखाए जा रहे सच में और दिख रहे सच में बड़ा अंतर है। श्री नैयर को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि मीडिया सच को सच के तौर पर परोसे। कार्यक्रम संयोजक रवि अरोड़ा ने कहा कि श्री नैयर अभिव्यक्ति की आजादी के पैरोकार थे। आपातकाल में जब देश के अधिकांश मीडिया के मुंह पर ताला था तब अभिव्यक्ति के नाम पर जो पहला व्यक्ति जेल गया वह कुलदीप नैयर ही थे।
नरसिंह अरोड़ा, संदीप त्यागी, अजय जैन, अजय औदिच्य, शकील अहमद, तेजवीर सिंह ने भी उनसे जुड़ी यादें साझा कीं। कार्यक्रम का संचालन फाउंडेशन के सचिव आलोक यात्री ने किया। इस अवसर पर अमरेंद्र राय, ओमपाल त्यागी, फरमान अली, मदद पांचाल, आशुतोश गुप्ता, आशुतोष यादव, धीरज ढिल्लों, राकेश शर्मा, संजय शाह, संजीव शर्मा, विभु मिश्रा, सुभाष अखिल, बलवीर सिंह, राजवीर सिंह, सुशील शर्मा, पवन अरोड़ा, अजय रावत, अकरम, अरविंद, शहबाज, अमित शर्मा, मुदित, राजीव शर्मा, धर्मेंद्र, तिलक राज अरोड़ा, के. के. सिंघल, डॉ. वीना मित्तल, सीमा सिंह, सोनम यादव, सरवर हसन सरवर विनीत गौड़, सी.पी. सिंह, प्रदुमन उपाध्याय, आर.के. भदौरिया, पुष्पेन्द्र सिंह, जयप्रकाश श्रीवास्तव, सहित बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी व अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।

Posted Date:

August 27, 2018 10:30 pm

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