दुष्यंत कुमार, राही मासूम रज़ा और हबीब तनवीर होने के मायने…
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September 1, 2018

आज रंगमंच और साहित्य जिस दौर में है, या कहिए कि मीडिया और अभिव्यक्ति के तमाम माध्यम जिन दबावों में काम करते हैं, वहां हबीब तनवीर, दुष्यंत कुमार और राही मासूम रज़ा (जिनका जन्मदिन एक ही तारीख यानी 1 सितंबर को आता है) के लिए जगह तलाश पाना आसान काम नहीं है। लेकिन भला हो डिजिटल ज़माने का जहां कई प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की किल्लत की वजह से इन शख्सियतों को ठीक ठाक जगह मिल जाती है।

‘नैयर साहब का जाना मन में टीस पैदा करता है’
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August 23, 2018

हम दोनों की ज़ड़ें मूल रूप से पाकिस्तान से थीं। इसलिए पाकिस्तान हमारा प्रिय विषय रहा। हमने वहां की राजनीति से लेकर तमाम पहलुओं पर खूब लिखा।  एक दूसरे का बतौर पत्रकार हम काफी सम्मान करते थे। लेकिन नैयर साहब दिल्ली में रहे और हर कूटनीतिक मामलों में उनकी कलम का लोहा तमाम लोगों ने माना। चाहे वो बांग्लादेश का मामला हो या पाकिस्तान का या फिर दूसरे पड़ोसी देशों का, कुलदीप नैयर की राय अहम म

दिल का खिलौना हाय टूट गया…
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August 21, 2018

उस्ताद बिस्मिल्ला खां को गुज़रे आज 12 साल हो गए, लेकिन न तो शहनाई का कोई और उम्दा कलाकार उभर कर सामने आ सका और न ही शहनाई का वो रुआब अब बाकी रह गया। शादी-ब्याह के दौरान, तमाम शुभ अवसरों पर शहनाई का बजना एक परंपरागत और बेहद संजीदा माहौल पैदा करता था। बिस्मिल्ला खां तब भी सबके आदर्श थे और तमाम पेशेवर शहनाईवादक उनकी ही धुनें बजाने को अपनी शान समझते थे। खासकर फिल्म गूंज उठी शहनाई के उस गीत की

सौ साल के त्रिलोचन…
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August 20, 2018

त्रिलोचन जी को याद करना एक पूरे युग को याद करने जैसा है। उनका विशाल रचना संसार और बेहद सरल व्यक्तित्व अब आपको कहीं नहीं मिलेगा। उनकी कविताओं को, उनकी रचना यात्रा को और उनके साथ बिताए गए कुछ बेहतरीन पलों को साझा करना शायद बहुत से लोग चाहें, लेकिन बदलते दौर में, नए सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में और साहित्यिक जमात की खेमेबाजी में त्रिलोचन आज भी हाशिए पर हैं। उनकी जन्म शताब्दि की औपचारि

‘हिंदुस्तान में दो-दो हिंदुस्तान दिखाई देते हैं…’
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August 18, 2018

एक संवेदनशील शायर और आसपास की दुनिया को बेहद करीब से देखने वाले गुलज़ार साहब के लिए जन्मदिन का मायना भले ही ये हो सकता है लेकिन अपने बेहतरीन लफ्ज़ों की बदौलत उन्होंने साहित्य और संगीत को जो दिया है, वो एक बेमिसाल ख़ज़ाना है। गुलज़ार यानी संपूर्ण सिंह कालरा को एक अलग पहचान बेशक फिल्म इंडस्ट्री से मिली हो लेकिन उनके भीतर का कवि और लेखक छोटी सी उम्र में ही आकार लेने लगा था।

अटल जी को उनकी इन कविताओं से समझिए…
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August 15, 2018

इन आखिरी सांसों में अटल जी के पीछे का पूरा अतीत है... जीवन की जंग है... अस्पताल का वेंटिलेटर है.. कृत्रिम सांसें हैं ... लेकिन अब एक एक पल भारी है... 7 रंग ने अटल जी को हमेशा पूरे सम्मान और संवेदना से अपने साथ पाया है.. आज भी हम उनके अतीत को याद करते हैं.. खुशनुमा और जीवंत लेकिन अकेले व्यक्तित्व को महसूस करते हैं... उनकी चंद कविताएं और तस्वीरें फिर से आपके लिए...

अतीत का आइना
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August 11, 2018

बदलते वक्त और विकास की अंधी दौड़ के साथ तमाम शहर बदल गए। हमारे गाज़ियाबाद की शक्ल-ओ-सूरत भी बदल गई। संस्कार से लेकर संस्कृति तक और विरासत से लेकर राजनीति तक.. आज़ादी के बाद से अबतक कैसे कैसे बदला ये शहर, क्या है इसकी कहानी, कैसी थी इसकी रवायत... हमारे शहर के ऐसे तमाम बुजुर्ग इस बदलाव के गवाह हैं, जिन्होंने गाजियाबाद को पल पल महसूस किया और जिया। ‘अमर उजाला’ ऐसे तमाम आदरणीय बुजुर्गों की या

केदार जी को याद करने के मायने…
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March 20, 2018

केदार जी का जाना एक सदमे की तरह है। उनसे न मिल पाने की कसक हमेशा रहेगी। कई बार मिलते मिलते रह गया। उनके साथ ठीक वैसे ही खुलकर और पारिवारिक तरीके से हर मसले पर बात करने की तमन्ना रह गई जैसे त्रिलोचन जी के साथ किया करता था। अपने बेहद अज़ीज बड़े भाई राजीव जी के साथ अक्सर यह तय हुआ कि एक दिन उनके घर पर ही केदार जी के साथ कुछ घंटे बिताए जाएं, लेकिन वह संयोग नहीं बन पाया।

तकनीकी बमबारी के बीच रंगमंच को बचाने का सही वक्त – वामन केन्द्रे
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February 27, 2018

रंगकर्म संस्कृति का वो अहम हिस्सा है जो किसी न किसी रूप में आम आदमी से जुड़ता है - दिल्ली समेत देश के 17 शहरों में आयोजित हो रहे थिएटर ओलम्पिक की मूल आत्मा यही है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक और थिएटर ओलंपिक को पहली बार अपने देश में करवाने वाले मशहूर रंगकर्मी वामन केन्द्रे इसे एक ऐसी ही उपलब्धि मानते हैं। उनका कहना है कि थिएटर को मौजूदा वक्त में आम लोगों से जोड़ने, उसे एक नई ताक

‘चांदनी’ का असमय ढल जाना…
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February 25, 2018

श्रीदेवी का जाना एक ऐसे दुखद सपने जैसा है जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। बचपन से हमसब ने श्रीदेवी की खूबसूरती, उनकी अदाकारी के तमाम शेड्स, उनका अल्हड़पन और उनकी आंखों में नागिन वाला गुस्सा सिल्वर स्क्रीन पर देखा है। उनकी नृत्य शैलियां, उनका गुस्सा, उनका प्यार, उनका अपनापन और वो सबकुछ जो उन्हें एक संपूर्ण अदाकार, एक बेहतरीन इंसान, एक आदर्श मां, एक शानदार व्यक्तित्व बनाता था...  

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