उन शख्सियतों की यादें जिन्होंने साहित्य, कला, संस्कृति के क्षेत्र में अहम मुकाम हासिल किए…


तबले के अनोखे जादूगर की याद…
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October 16, 2018

पंडित लच्छू महाराज जब तबले के साथ होते थे तो वक्त मानो ठहर जाता था। नन्हीं सी उम्र में लगातार 16 घंटे तबला बजाकर सितारा देवी जैसी मशहूर कथक नृत्यांगना को हैरत में डाल देने वाले लच्छू महाराज ने तबले को जो ऊंचाई दी, वह उनके बाद के दौर के तबलावादकों के बस की बात नहीं। सितारा देवी के 20 मिनट के नृत्य के कार्यक्रम में पंडित जी ने तबले के इतना उतार चढ़ाव दिखाए कि सितारा देवी के पांव तबतक थिरकत

‘नैयर साहब का जाना मन में टीस पैदा करता है’
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August 23, 2018

हम दोनों की ज़ड़ें मूल रूप से पाकिस्तान से थीं। इसलिए पाकिस्तान हमारा प्रिय विषय रहा। हमने वहां की राजनीति से लेकर तमाम पहलुओं पर खूब लिखा।  एक दूसरे का बतौर पत्रकार हम काफी सम्मान करते थे। लेकिन नैयर साहब दिल्ली में रहे और हर कूटनीतिक मामलों में उनकी कलम का लोहा तमाम लोगों ने माना। चाहे वो बांग्लादेश का मामला हो या पाकिस्तान का या फिर दूसरे पड़ोसी देशों का, कुलदीप नैयर की राय अहम म

परसाई जी ने प्रेमचंद के फटे जूतों को कैसे देखा
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August 22, 2018

परसाई जी ने व्यंग्य को जो नए आयाम दिए, उन्होंने देश, समाज, रिश्ते-नाते, राजनीति और साहित्य से लेकर मध्यवर्ग की महात्वाकांक्षाओं को अपनी चुटीली शैली में जिस तरह पेश किया, वह अब के लेखन में आप नहीं पा सकते। हरिशंकर परसाई के विशाल रचना संसार से गुजरते हुए आपको उनके व्यक्तित्व की पूरी झलक मिल जाएगी। ये भी पता चलेगा कि दौर चाहे कोई भी हो, अगर आपका नज़रिया साफ हो, समाज और व्यक्ति को देखने की

दिल का खिलौना हाय टूट गया…
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August 21, 2018

उस्ताद बिस्मिल्ला खां को गुज़रे आज 12 साल हो गए, लेकिन न तो शहनाई का कोई और उम्दा कलाकार उभर कर सामने आ सका और न ही शहनाई का वो रुआब अब बाकी रह गया। शादी-ब्याह के दौरान, तमाम शुभ अवसरों पर शहनाई का बजना एक परंपरागत और बेहद संजीदा माहौल पैदा करता था। बिस्मिल्ला खां तब भी सबके आदर्श थे और तमाम पेशेवर शहनाईवादक उनकी ही धुनें बजाने को अपनी शान समझते थे। खासकर फिल्म गूंज उठी शहनाई के उस गीत की

सौ साल के त्रिलोचन…
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August 20, 2018

त्रिलोचन जी को याद करना एक पूरे युग को याद करने जैसा है। उनका विशाल रचना संसार और बेहद सरल व्यक्तित्व अब आपको कहीं नहीं मिलेगा। उनकी कविताओं को, उनकी रचना यात्रा को और उनके साथ बिताए गए कुछ बेहतरीन पलों को साझा करना शायद बहुत से लोग चाहें, लेकिन बदलते दौर में, नए सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में और साहित्यिक जमात की खेमेबाजी में त्रिलोचन आज भी हाशिए पर हैं। उनकी जन्म शताब्दि की औपचारि

चोट भी सुखद रही, सारी ज़िंदगी रहा अटल जी का हाथ: कृष्ण मित्र
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August 18, 2018

अटल जी का कहा एक वाक्य याद है। श्री कांबोज जी ने मुख्य अतिथि की शान में काफी कसीदे पढ़े। श्री वाजपेई जी ने अपना संबोधन यहां से प्रारंभ किया "मैं मेहमान नहीं हूं, अतिथि हूं।" उन्होंने श्रोताओं से सवाल किया अतिथि किसे कहते हैं"? जवाब भी खुद ही दिया। "अतिथि वह होता है जो तिथि निर्धारित किए बिना ही आ जाए।" और बाद के दिनों में उनका यह कथन कई बार व्यवहारिक रूप में भी सामने आया। कई भाजपा नेताओं क

गाजियाबाद से भी गहरा रिश्ता था अटल जी का
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August 16, 2018

अटल जी बेशक अब हमारे बीच न रहे हों, लेकिन उनकी यादें हर शहर के तमाम लोगों के दिलों में बसी हैं। वो जहां भी जाते, उस जगह के लोगों से एक आत्मीय रिश्ता जोड़ लेते थे। अपने लंबे राजनीतिक और साहित्यिक जीवन में अटल जी का गाजियाबाद से भी ऐसा ही लगाव था।

केदार जी को याद करने के मायने…
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March 20, 2018

केदार जी का जाना एक सदमे की तरह है। उनसे न मिल पाने की कसक हमेशा रहेगी। कई बार मिलते मिलते रह गया। उनके साथ ठीक वैसे ही खुलकर और पारिवारिक तरीके से हर मसले पर बात करने की तमन्ना रह गई जैसे त्रिलोचन जी के साथ किया करता था। अपने बेहद अज़ीज बड़े भाई राजीव जी के साथ अक्सर यह तय हुआ कि एक दिन उनके घर पर ही केदार जी के साथ कुछ घंटे बिताए जाएं, लेकिन वह संयोग नहीं बन पाया।

‘चांदनी’ का असमय ढल जाना…
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February 25, 2018

श्रीदेवी का जाना एक ऐसे दुखद सपने जैसा है जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। बचपन से हमसब ने श्रीदेवी की खूबसूरती, उनकी अदाकारी के तमाम शेड्स, उनका अल्हड़पन और उनकी आंखों में नागिन वाला गुस्सा सिल्वर स्क्रीन पर देखा है। उनकी नृत्य शैलियां, उनका गुस्सा, उनका प्यार, उनका अपनापन और वो सबकुछ जो उन्हें एक संपूर्ण अदाकार, एक बेहतरीन इंसान, एक आदर्श मां, एक शानदार व्यक्तित्व बनाता था...  

शशि कपूर – कुछ यादें
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December 5, 2017

...सन १९८४ में मुझे उनके साथ कुछ दिन बिताने का सौभाग्य मिला था। मैं 'पृथ्वी थियेटर' संदर्भित शोध पत्र तैयार कर रहा था ...हम रोज़ 'कौशल्या कोटेज'में मिलते थे जहाँ शशि कपूर जी की शूटिंग चल रही थे ...उनके साथ  तनुजा और नीलू फूले भी दृश्यों में थे ....

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