संगीत और नृत्य का गहरा नाता है। बिना संगीत के नृत्य नहीं हो सकता। लय और ताल के साथ साथ भाव भंगिमाओं और मुद्राओं का नृत्य में खास महत्व है। खासकर भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की परंपराएं पूरी दुनिया में सबसे बेहतरीन हैं। यहां की नृत्य शैलियों में हमारी पौराणिक कथाएं भी हैं, जीवन दर्शन भी है और सामाजिक-सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां भी हैं। कथक, भरतनाट्यम, कथकली, ओड़िसी, मणिपुरी के अलावा लोक व आदिवासी जैसी तमाम ऐसी नृत्य शैलियां हैं जो हमारी संस्कृति को समृद्ध करती हैं। इस खंड में ऐसे तमाम कलाकारों और प्रस्तुतियों की झलक मिलेगी जो आम तौर पर मुख्य धारा की मीडिया में नज़र नहीं आती।


नृयांगना लक्ष्मी श्रीवास्तव की नई नृत्य नाटिका ‘उषा परिणय’
mm 7 Rang
July 11, 2017

भरतनाट्यम शैली के अलावा कथक और अन्य नृत्य शैलियों को मिलाकर कुछ नए प्रयोग करने वाली नृत्यांगना लक्ष्मी श्रीवास्तव एक बार फिर अपनी मशहूर नृत्य नाटिक ‘उषा परिणय’ का मंचन करने जा रही हैं। इसका आयोजन भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से 13 जुलाई को होने जा रहा है। डॉ योगेश प्रवीण इसके रचनाकार हैं और हेम सिंह ने संगीत दिया है।

नृत्य नाटिका उषा परिणय का मंचन
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September 24, 2016

लखनऊ में उत्तर प्रदेश नाटक अकादमी के संत गाडगे सभागार में नृत्य नाटिका ऊषा परिणय का मंचन किया गया। पौराणिक कथा में संगीत नृत्य के अद्भुत संगम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य नाटिका में वाणासुर, कृष्ण और शिव के मन में ऊषा और अनिरुद्ध कोे परिणय को लेकर चल रहे अंतर्द्वंद की कहानी को दर्शकों के सामने पेश किया गया।

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