Trouble For Knowing How To Tell Should your Woman Likes You Throughout Text
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July 18, 2017

How to get girls is the one question that is upper most inside the minds of all men. Through the years men are trying everything under the Sun to attract and win Venusians. Here are some elements which can definitely help you in focusing on how to attract girls. In case you know the art from attraction, then it is very easy to win any girl. Chasing girls will not be compulsory for you any more. Instead, they will arrive to you and that is what is really important in attracting girls. How to build girls is no more problem.

You can clear up the problem of how to attract kids by having good communication skills. Making a quality conversation will help creating a favorable mindset in girl for you. With very good communication skills, you can add some space to any female's heart. And maintaining a good eye contact during over-all conversation is also very vital.

Critical thing in the process of appealing to girls is classy presentation and pretension. Though pseudo-intell

Welcome world
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May 11, 2017

It's my first article

प्रमोद कौंसवाल की कलम से —
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November 30, 2016

pramod-kaunswal प्रमोद कौंसवाल  (कवि, कहानीकार और पत्रकार) प्रमोद तकरीबन 28 साल से पत्रकारिता के पेशे में हैं। अमर उजाला, जनसत्ता से लेकर सहारा तक। अख़बारी पत्रकारिता भी की और टीवी में भी बहुत वक्त गुज़ारा। लेकिन मन बसता है लिखने पढ़ने में। सो पत्रकारिता महज नौकरी बन गई और लेखन इनकी पहचान।

जश्न-ए-रेख़्ता 17 फरवरी 2017 से दिल्ली में
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November 29, 2016

  जश्न-ए-रेख़्ता, ३ दिवसीय वार्षिक महोत्सव जिसके जरिए उर्दू भाषा के जन्म और विकास का जश्न मनाया जाएगा। इस महोत्सव के जरिए ऊर्दू भाषा के जन्म और भारतीय उपमहाद्वीप में उसके विकास की सराहना और इसकी सुंदरता और बहुमुखी प्रतिभा के प्रति जागरुकता पैदा करना है। इस त्योहार में कविता, गद्य, नाटक, कला, सिनेमा , गायन, मुशायरा, पैनल चर्चा, फिल्म प्रदर्शन के माध्यम से उर्दू भाषा की महान विरासत क

परंपरा के बंधन में बंधे दो देश
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November 29, 2016

साउथ कोरिया का यूपी कनेक्शन साउथ कोरियाइस देश को दुनिया ‘शांत सुबह की भूमि’ के रुप में भी जानती है। ये देश पूर्वी एशिया में कोरियाई प्रायद्वीप के दक्षिणी अर्धभाग को घेरे हुए है। भारत के साथ भी दक्षिण कोरिया के व्यापारिक और आर्थिक रिश्ते अच्छे रहे हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच एक मजबूत पारंपरिक रिश्ता भी है जि

जहां दीवारें बोलती हैं…
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November 29, 2016

चलिए दिल्ली के शाहपुर जट

• प्रदीप सिन्हा दीवार पर उकेरे गए सात रंग और हर एक रंग की अलग कहानी। रचनात्मकता का मिश्रण और अभिव्यक्ति की आज़ादी, ये कुछ तस्वीरें अपने आप में बहुत कुछ बयां कर जाती हैं। राजधानी दिल्ली की चकाचौंध और भागदौड़ के बीच एक छोटा सा इलाका है शाहपुर जट, कहनेवाले तो इसे गांव भी कहते हैं लेकिन इन छोटी छोटी इमारतों और पतली गलियों म

मस्तानी महल का सूरत-ए-हाल देखिए
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November 29, 2016

फिल्मी परदे की भव्यता और आज की हकीकत

बाजीराव मस्तानी फिल्म के मस्तानी लोकजीवन से कुछ अलग हट कर नयी चर्चा का केंद्र बनी। जरूरी नहीं कि फिल्म का सारा कथानक सही ही हो। मस्तानी महाराजा छत्रसाल की बेटी नहीं थी, लेकिन उसे किसी राजकुमारी जैसा ही पाला गया था और उसके लिए महल भी बनाया था। आज यहां भारी भीड़ उमड़ रही है। लेकिन लोगों ने इस महल को बुरी दशा मेें पहुंचा दिया

इन धरोहरों को बचाना है
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November 29, 2016

छतरपुर में गढ़ी मलेहरा बरबाद हो रहा है

बुंदेलखंड की एक से एक शानदार धरोहरें यहां की आन-बान और शान को बयान करती हैं। आज यह इलाका सूखा और कृषि संकट से तबाह है। तो भी यहां की प्राकृतिक संपदा से लखनऊ और भोपाल का खजाना भर रहा है। यहां कदम कदम पर बिखरी धरोहरें ध्वस्त हो रही हैं। उनको हम दोबारा बना तो नहीं सकते। लेकिन इनको सहेजना कठिन नहीं है। थोड़ा धन व्यय होगा तो इसक

वास्तुदोष हटाएं, खुशहाल ज़िंदगी पाएं
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November 29, 2016

हर कमरा कुछ कहता है

shalu • शालिनी प्रिया सिन्हा (वास्तु और ज्योतिष विशेषज्ञ) घर या फ्लैट के कमरे, रसोईघर, पूजाघर, खिड़की, दरवाज़े और आलमारियां आदि के रख रखाव में दिशाओं का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है। इसी कड़ी में हम आपको बताना चाहेंगे कि कैसे करीने से सजा हुआ घर आपके व्यक्तित्व में चार चांद ल

भाषा और शब्दों से खेलने की सियासत
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November 29, 2016

दिव्यांग भाषा का विकलांग पथ...

शब्द का अपकर्ष भाषा की हत्या है। विकलांग शब्द का दिव्यांग किया जाना मैं एक शब्द की हत्या मानता हूं। संवेदनशील समाज तो विकलांग शब्द का प्रयोग पहले भी बेहद सम्मान के साथ किया करता था। बस, ट्रेन या किसी भी अन्य स्थान पर विकलांग बंधुओं के लिए संवेदनशील लोग सदैव सहानुभूति रखते हैं। जिन लोगों की सोच बदलने के लिए दिव्यांग शब्द लाया गया है, उनके लिए त

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