रंजीता के रंग और कला की दुनिया

 

एक कलाकार की दृष्टि और उसकी कल्पनाशक्ति का अंदाज़ा आप उसकी कलाकृतियों से लगा सकते हैं। उसके रंगों की एक भाषा होती है और जब उसकी कला मानवीय संवेदनाओं से जुड़ती है तो एक अलग ही दुनिया बनती है। अपनी कल्पनाओं को कैनवस पर उतार कर जिस तरह रंजीता कांत ने इस भीड़ में भी अपनी पहचान बनाने की कोशिश की है, वह कम महिलाएं कर पाती हैं। रंजीता कांत की कला यात्रा के कई पड़ाव हैं – दिल्ली से लेकर केरल तक और बाली से लेकर बंगाल के शांतिनिकेतन तक। बचपन में पेंटिंग बनाने और चित्रकारी करने का शौक हर किसी को होता है, रंजीता को भी था। लेकिन पढ़ाई उन्होंने एक सामान्य छात्रा की तरह की, एंथ्रोपोलॉजी में एमए किया लेकिन कलाकार बनने का सपना संजोए रहीं। उनके सपनों ने आकार लिया परिवार बसाने के बाद। पति अमिताभ कांत के केरल काडर के आईएएस होने की वजह से उन्हें केरल के तमाम इलाकों में रहने और वहां की प्रकृति और खूबसूरती को देखने-महसूस करने का खूब मौका मिला। दिल्ली के त्रिवेणी कला संगम में उन्होंने बाकायदा खुद को कलाकार के रूप में ढाला और फिर उनकी कला में लगातार निखार आता गया।

पिछले पंद्रह वर्षों में रंजीता की कलाकृतियां करीब दस एकल प्रदर्शनियों और पंद्रह से ज्यादा सामूहिक प्रदर्शनियों के ज़रिये कला प्रेमियों तक पहुंचीं और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। बर्लिन से लेकर लंदन तक और , दिल्ली से लेकर म्यांमार तक उनकी प्रदर्शनियों ने कलाप्रेमियों का दिल जीता। कैनवस के अलावा इंटीरियर्स, स्टेन ग्लास और टेक्सटाइल पर उनके काम कहीं न कहीं प्रकृति, पर्यावरण और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े रहे हैं। रंजीता कांत की कुछ कृतियां 7 रंग के पाठकों और दर्शकों के लिए….

 

Posted Date:

June 7, 2017 11:17 pm

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