‘बटरफ्लाई’ दादी का हौसला

दिनेश सिंह
इलाहाबाद की एक बुजुर्ग महिला मिसाल हैं उन तमाम महिलाओं के लिए जो अपनों से मिले जख्म के चलते या तो टूट जाती हैं या फिर जिन्दगी से हार मान लेती हैं| सीनियर साइंटिस्ट की पत्नी और विदेशों में लाखों की नौकरी कर रहे तीन तीन बेटों ने सत्तर बरस की अपनी इस बुजुर्ग माँ को बेवजह जब घर से बाहर कर सड़क का रास्ता दिखा दिया तब उन्होंने अपने कंपकंपाते बूढ़े हाथों से अपनी जिन्दगी की इबारत खुद अकेले लिखनी शुरू की| बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर उन्होंने एक ई-रिक्शा खरीदा जिसे इलाहाबाद की सड़कों पर खुद चलाकर वह न केवल अपने पैरों पर खड़ी हो गई हैं बल्कि अपने बचे पैसों से गरीब घरों की लड़कियों को भी पढ़ा रही हैं ताकि उनके जैसे हालात में कोई लड़की ज़िन्दगी की जंग न हार जाए| बुजुर्ग महिलाओं में जिन्दगी जीने का नया हौसला भरने में लगी इस बुजुर्ग महिला बीणा को लोग उनके नाम से कम बटरफ्लाई वाली दादी के नाम से ज्यादा बुलाते हैं क्योंकि बीणा बटरफ्लाई की शक्ल वाला ई-रिक्शा चलाती हैं |
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आज से चालीस साल पहले इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एमए और बीएड की पढ़ाई पूरी कर चुकी वीणा ने अपने साइंटिस्ट पति उमेश उप्रेती को पूरा समय देने के लिए कॉलेज में लगी अपनी नौकरी छोड़ दी| लेकिन जिन्दगी के आख़िरी दिनों में जब उन्हें अपने जीवनसाथी की जरुरत थी तो उसके जीवन साथी ने उन्हें घर से निकाल कर सड़क का रास्ता दिखा दिया |
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पति ने बीणा के दाम्पत्य जीवन की वीणा के तार तो तोड़ ही दिए साथ ही उनकी बची खुची आस भी विदेशों में मल्टी नेशनल कंपनी में लाखों रुपये हर महीने कमा रहे उनके तीनों बेटों ने भी तोड़ दी| शायद इसलिए कि वाणी उनकी सौतेली माँ हैं| उम्र के जिस दौर में जीवनसाथी और औलाद से अपनापन का सबसे अधिक भरोसा होता है उसमे वाणी को बेसहारा कर सड़क का रास्ता दिखा दिया गया लेकिन वाणी ने हार नहीं मानी। अपनी मेहनत से बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर इकट्ठा किये पैसो से एक ई रिक्शा खरीदा और निकल पड़ी इलाहाबाद की सड़कों पर अपने हौसले की उड़ान के साथ| शहर की सड़को में सवारी का इंतजार कर रही महिला सवारियों की पहली पसंद वीणा का ई रिक्शा है जिसमें बैठकर वह वीणा के हौसले से भी रूबरू होती हैं|

Posted Date:

March 25, 2016 5:26 pm

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