झीनी झीनी बीनी चदरिया…

कोई सपने बुनता है। कोई सच बुनता है।
तो कोई अपने समय को बुनता है।
सदियों से इंसान बुन रहा है।
काल, समाज और इतिहास के सैकड़ों सूत्र इस बुनने से जुड़े हुए हैं।
अतीत का बुना हुए वर्तमान के लिए चादर हो जाता है।
कबीर भी बुनते थे -झीनी-झीनी बीनी चदरिया।
आपने कभी गौर से करघे पर किसी को बुनते हुए देखा है ?
ताना और बाना की जुगलबंदी और साथ में करघे का संगीत…अद्भुत लगता है।
कुछ दिन पहले में चंदेरी के दर्जनों स्वाभिमानी बुनकरों से मिला था।
ढेर सारी बातें हुई थीं। ढेर सारी तस्वीर भी खींची हमने ।
खूबसूरत साड़ियों और पत्थर की गलियों के लिए मशहूर है चंदेरी।
हर गलियां करघों के संगीत में डूबी हुई।
करघे चलते हैं तो वक्त चलता है यहां।
यहां आकर महसूस हुआ…कुछ हजार रुपए में जो खूबसूरत साड़ी हम लोग खरीद कर ले जाते हैं, दरअसल वह रेशम के धागे से बना छह गज कपड़े का सिर्फ एक टुकड़ा भर नहीं होता।
करघे पर किसी हुनरमंद हाथों के द्वारा लिखी कविता होती है …।
यह तस्वीर चंदरी के ही एक बुनकर की है।

(पत्रकार और कलाकार देवप्रकाश चौधरी के फेसबुक वॉल से साभार)

Posted Date:

July 4, 2017 7:31 pm

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