अंडमान की संस्कृति की बात ही कुछ और है…

सुंदर समुद्री तट, सेलुलर जेल के अलावा भी बहुत कुछ है अंडमान में…

अंडमान निकोबार द्वीप समूह बाहर की दुनिया के लिए किसे अजूबे से कम नहीं। आम तौर पर सैलानियों के लिए यहां के खूबसूरत समुद्र तट और ऐतिहासिक सेलुलर जेल की तस्वीरें आकर्षण की मुख्य वजह है। जो पारंपिरक किस्म के सैलानी हैं वो सेलुलर जेल यानी कि अंग्रेज़ों के ज़माने में ‘काला पानी’ के नाम से मशहूर इस ऐतिहासिक धरोहर को देखने आते हैं और देशभक्ति की तमाम कहानियां सुनते हैं और उन जननायकों को याद करते हैं।

लेकिन जो विदेशी सैलानी हैं वो यहां के बेहतरीन समुद्र तटों का आनंद उठाने आते हैं। लेकिन आप ताज़्जुब करेंगे कि फिल्मकारों के लिए यहां की वो जनजातियां खास दिलचस्पी पैदा करती हैं जिनके लिए कहा जाता है कि वो करीब 50 हजार साल पहले अफ्रीका से आई थीं। ये जनजातियां यहां आज भी हैं और उन सुदूर जंगलों में अपनी परंपराओं और मान्यताओं के साथ जीवन काटती हैं। इनमें सबसे खतरनाक जनजाति मानी जाती है जारवा। वैसे तो अब इनकी संख्या बेहद कम बची है और संभवत: 400 से 500 लोग ही करीब 300 वर्ग मील के दायरे में रहते हैं। इन्हें मुख्य धारा में लाने की कई कोशिशें भी हुईं लेकिन वो आज भी हजारों साल पुरानी आदिम संस्कृति में ही जीना पसंद करते हैं। सरकार ने इनके संरक्षण के लिहाज़ से उन्हें विशेष दर्ज़ा दे रखा है और उनके इलाके में पुलिस को भी दखल देने की इजाजत नहीं है। लेकिन गैरकानूनी तरीके से टूरिस्ट गाइड और टूर ऑपरेटर्स सैलानियों को दक्षिण अंडमान के उन इलाकों में ले जाते हैं जहां जारवा जनजाति के लोग रहते हैं। विकास के नाम पर यहां अंडमान ग्रांड रोड बनाया गया है और इस दौरान जारवा आदिवासी कई बार हिंसक भी हुए, उन्हें अपना अस्तित्व संकट में दिखा, कई अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन उनके समर्थन में सामने भी आए कि ऐसी दुर्लभ जनजातियों का संरक्षण जरूरी है और उनके साथ चिड़ियाघर के जानवरों की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए।

अंडमान का अपना ऐतिहासिक महत्व है और यहां की कला संस्कृति बेहद अनोखी है। यहां की नृत्य शैलियां और संगीत बेशक आदिवासी संस्कृति का नायाब नमूना है लेकिन आधुनिक और पाश्चात्य जीवन शैली में जीने के आदी होते जा रहे लोगों के लिए इस प्राकृतिक और पारंपरिक खूबसूरती के बीच चंद दिन गुज़ारना बेशक बेहद दिलचस्प है। ज़रूरत है अंडमान और निकोबार को पर्यटन और संस्कृति के बारे में देश में ही नहीं पूरी दुनिया में और ज्यादा प्रचारित, प्रसारित करने की। 7 रंग इस मुहिम को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।

Posted Date:

July 23, 2017 8:58 am

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